कोरर को अपना घर मानकर जीवनभर सेवा करने वाले शिक्षक महेश्वर सिंह दीवान का निधन

समाचार : प्रशांत सिन्हा कांकेर  

प्रमोशन के साथ कई बार तबादले के आदेश आए, लेकिन कोरर नहीं छोड़ा; शिक्षा, NCC, खेल और समाजसेवा में रहा अतुलनीय योगदान

कोरर। कोरर के प्रतिष्ठित एवं सम्माननीय शिक्षक श्री महेश्वर सिंह दीवान जी का 12 सितंबर 2026 की रात करीब 1:30 बजे अस्वस्थता के कारण निधन हो गया। उनके निधन की खबर से कोरर सहित आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर है। शिक्षा, NCC, खेल एवं सामाजिक क्षेत्र में उनके योगदान को क्षेत्रवासी लंबे समय तक याद रखेंगे।

श्री महेश्वर सिंह दीवान का मूल निवास धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड के जोरातराई सिंगलदीप ग्राम में था। वे एक प्रतिष्ठित दाऊ परिवार से संबंध रखते थे। परिवार के पास सैकड़ों एकड़ जमीन एवं जमींदारी होने के बावजूद उन्होंने सुख-सुविधाओं को प्राथमिकता न देते हुए कोरर को अपनी कर्मभूमि ही नहीं, बल्कि अपना घर बना लिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्री दीवान जी ने कोरर में ही अपने शासकीय सेवाकाल की शुरुआत की थी। कोरर हायर सेकेंडरी स्कूल में सेवा के प्रारंभ से लेकर सेवानिवृत्ति तक उन्होंने पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य किया। वे एक नेकदिल, अनुशासनप्रिय एवं समर्पित शिक्षक होने के साथ-साथ NCC के मेजर रैंक के अधिकारी भी रहे।

कोरर में NCC की शुरुआत में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

कोरर में NCC की शुरुआत करने में श्री महेश्वर सिंह दीवान जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, नेतृत्व, राष्ट्रसेवा और खेलों के प्रति प्रेरित किया। शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को वे हमेशा महत्व देते थे।

प्रमोशन मिला, तबादले के आदेश आए, लेकिन कोरर नहीं छोड़ा

श्री महेश्वर सिंह दीवान जी का कोरर से लगाव कितना गहरा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई बार   प्रमोशन के साथ उन्हें कोरर से अन्य स्थानों पर स्थानांतरण के आदेश मिले, लेकिन उन्होंने पदोन्नति की अपेक्षा अपनी कर्मभूमि कोरर में रहना अधिक महत्वपूर्ण समझा।

उन्होंने प्रमोशन तक छोड़ दिया, लेकिन कोरर नहीं छोड़ा।

कोरर और यहां के लोगों के प्रति उनका यह लगाव अपने आप में एक मिसाल है। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय कोरर और यहां के लोगों के बीच बिताया। यही कारण है कि उनका निधन केवल एक शिक्षक की विदाई नहीं, बल्कि कोरर के अपने ऐसे व्यक्तित्व का चले जाना है, जिसने इस क्षेत्र को अपना परिवार माना।

बच्चों को दिए अच्छे संस्कार, सभी शासकीय सेवा में

श्री महेश्वर सिंह दीवान जी न केवल एक आदर्श शिक्षक थे, बल्कि एक जिम्मेदार एवं समर्पित पिता भी थे। उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश में शिक्षा, संस्कार, अनुशासन और जिम्मेदारी को विशेष महत्व दिया।

उनके परिवार में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती निरकला दीवान जी, चार बेटियां एवं एक पुत्र हैं। उन्होंने अपने सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा एवं संस्कार दिए। उनके सभी बच्चे वर्तमान में शासकीय सेवा में संलग्न हैं, जो उनके जीवनभर की मेहनत, अनुशासन और संस्कारों का परिचायक है।

बच्चों के विवाह के पश्चात भी श्री दीवान जी ने कोरर को ही अपना घर बनाए रखा और अपनी धर्मपत्नी श्रीमती निरकला दीवान जी के साथ यहीं निवास करते रहे। हाल के दिनों में उनके पुत्र श्री गुरमीत सिंह दीवान एवं उनकी पत्नी भी उनके साथ कोरर में निवास कर रहे थे। परिवार के सभी सदस्य साथ रहकर सुखद पारिवारिक जीवन व्यतीत कर रहे थे, लेकिन अचानक घटी इस दुखद घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

शिक्षा के साथ खेल और सामाजिक क्षेत्र में भी योगदान

श्री दीवान जी की खेलों के प्रति भी गहरी रुचि थी। वे विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ खेलकूद एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। उनके स्नेह, अनुशासन और मार्गदर्शन से कोरर के अनेक विद्यार्थियों ने प्रेरणा प्राप्त की।

उनका सरल स्वभाव, अनुशासनप्रिय जीवन, विद्यार्थियों के प्रति स्नेह और समाज के प्रति समर्पण उन्हें एक विशिष्ट व्यक्तित्व बनाता था।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि श्री महेश्वर सिंह दीवान जी की कमी कोरर में कभी पूरी नहीं हो सकती। कोरर के महान एवं यादगार व्यक्तित्वों में उनका नाम हमेशा सम्मान के साथ स्मरण किया जाएगा। उन्होंने जिस तरह अपनी पूरी सेवा और जीवन को कोरर के लिए समर्पित किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगा।

कोरर ने अपना एक शिक्षक, मार्गदर्शक, संस्कारवान पिता और सच्चा सेवक खो दिया है।

भावभीनी श्रद्धांजलि

ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

ॐ शांति। 🙏


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