दोलंदा में बाघ का हमला, 60 वर्षीय हरिदास वड्डे की मौत

एटापल्ली, तालुका  संवाददाता  प्रणित पेद्ल्लीवार   


इंसानी जान गई तो ग्रामीणों का फूटा गुस्सा; प्रशासन के खिलाफ नाराजगी, तत्काल कार्रवाई की मांग

 एटापल्ली तालुका :- जारावंडी क्षेत्र के दोलंदा गांव में बाघ के हमलेमे 60 वर्षीय हरिदास बहरन वड्डे की मौत की घटना से जारावंडी–दोलंदा क्षेत्र में दहशत का माहौल है। रविवार, 16 अगस्त 2026 को सामने आई इस घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश बढ़ गया है।


ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में पिछले कुछ समय से वन्यप्राणियों की गतिविधियां बढ़ी हैं। पहले पालतू जानवरों पर हमलों की घटनाएं सामने आ रही थीं। अब एक इंसान की जान जाने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है।


मिली जानकारी के अनुसार, हरिदास वड्डे सुबह घर से जंगल की ओर गए थे। काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। तलाश के दौरान घर से करीब 500 मीटर की दूरी पर उनका शव मिला।



घटनास्थल की परिस्थितियों को देखते हुए बाघ के हमले की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, घटना की वास्तविक स्थिति वन विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।


ग्रामीणों का सवाल—पहले कार्रवाई क्यों 


घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब क्षेत्र में वन्यप्राणियों की मौजूदगी और पालतू जानवरों पर हमलों की जानकारी सामने आ रही थी, तो नागरिकों की सुरक्षा के लिए समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए?


ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल ठोस उपाय करने की मांग की है।


अब आश्वासन नहीं, कार्रवाई चलल


ग्रामीणों का कहना है कि एक इंसान की जान जाने के बाद केवल पंचनामा और आश्वासन पर्याप्त नहीं है। भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए प्रशासन को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।


दोलंदा, जारावंडी और आसपास के गांवों में भय का माहौल है। जंगल से सटे खेतों में काम करने वाले किसान, मजदूर और ग्रामीण विशेष रूप से चिंतित हैं।


ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग और प्रशासन ने बाघ के बंदोबस्त तथा नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल ठोस कार्रवाई नहीं की, तो जारावंडी में चक्काजाम आंदोलन किया जाएगा।


साथ ही मृतक हरिदास वड्डे के परिवार को नियमानुसार तत्काल आर्थिक सहायता देने और क्षेत्र में वन विभाग की प्रभावी निगरानी व्यवस्था शुरू करने की मांग की गई है।


दोलंदा की घटना ने वन विभाग और प्रशासन के सामने सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई चाहिए।


इंसानी जान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में प्रशासन और वन विभाग से ग्रामीणों ने तत्काल कदम उठाकर क्षेत्र में भय का माहौल दूर करने की मांग की

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