6-7 घंटे बिजली कटौती, स्मार्ट मीटर से भारी-भरकम बिल और खाद की कालाबाजारी से भड़के ग्रामीण — मांग पूरी नहीं होने पर कोरर में होगा प्रदर्शन
कोरर. कोरर क्षेत्र में अघोषित बिजली कटौती, स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद आ रहे अत्यधिक बिजली बिल और सोसायटियों में खाद की किल्लत को लेकर ग्रामीणों एवं किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को कोरर में क्षेत्र के 52 गांवों के प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में ग्रामीण समस्याओं के निराकरण के लिए प्रशासन से एक सप्ताह के भीतर ठोस कार्रवाई की मांग की गई।
ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को लेकर नायब तहसीलदार एवं बिजली विभाग के जेई को आवेदन सौंपा। साथ ही दो-टूक चेतावनी दी गई कि यदि तय समय-सीमा में समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो 1 सितंबर को कोरर बस स्टैंड में सुबह 10 बजे से महा-चक्काजाम किया जाएगा।
6 से 7 घंटे रोजाना बिजली कटौती से ग्रामीण परेशान
ग्रामीणों का कहना है कि हाटकर्रा, तुयेगुहान , हेटारकसा, बनोली और असतरा सहित दर्जनों गांवों में रोजाना करीब 6 से 7 घंटे बिजली बंद रहती है। बारिश के मौसम में खेती-किसानी का काम चरम पर है और किसानों को सिंचाई सहित अन्य आवश्यक कार्यों के लिए बिजली की जरूरत होती है। ऐसे समय में लंबे समय तक बिजली बंद रहने से ग्रामीणों और किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने अघोषित बिजली कटौती को तत्काल बंद कर अगले 5-6 दिनों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
स्मार्ट मीटर से भारी-भरकम बिल का आरोप
ग्रामीणों ने स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद बिजली बिल में अप्रत्याशित बढ़ोतरी की शिकायत भी की। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई उपभोक्ताओं को भारी-भरकम बिजली बिल प्राप्त हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने तथा बिलों की जांच कर वास्तविक खपत के अनुसार बिल जारी करने की मांग की है।
खाद की किल्लत और कथित ओवररेटिंग से किसान परेशान
बैठक में खाद की समस्या भी प्रमुखता से उठाई गई। हाटकर्रा, बांस्कुंड, तरांदुल, तोनका, धनैली, कठौली और खसगांव क्षेत्र के किसानों ने बताया कि लैम्प्स के माध्यम से पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
किसानों के अनुसार मजबूरी में उन्हें निजी दुकानों का रुख करना पड़ रहा है, जहां दुकानदारों द्वारा तय दर से अधिक कीमत पर खाद बेचने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कई मृत किसानों के नामांतरण एवं पावती की प्रक्रिया अटके होने के कारण भी खाद-बीज मिलने में दिक्कत आ रही है। किसानों ने खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, कालाबाजारी एवं ओवररेटिंग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
मांग पूरी नहीं हुई तो 1 सितंबर को महा-चक्काजाम
बैठक में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि बिजली कटौती, बिजली बिल, खाद की उपलब्धता और ओवररेटिंग जैसी समस्याओं का शीघ्र निराकरण किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन को एक सप्ताह का समय दिया है।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि तय समय-सीमा में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो 1 सितंबर को कोरर बस स्टैंड में सुबह 10 बजे से महा-चक्काजाम एवं प्रदर्शन किया जाएगा। इसके लिए क्षेत्र के 52 गांवों के ग्रामीणों और किसान प्रतिनिधियों को एकजुट किया जा रहा है।
बैठक के दौरान हेमंत ध्रुव, शिवा शुक्ला, सरोज मरकाम सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान एवं ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के विरोध में नहीं, बल्कि क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं के समाधान और किसानों के हित में होगा।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
- अघोषित बिजली कटौती तत्काल बंद की जाए।
- गांवों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
- स्मार्ट मीटर से आ रहे भारी-भरकम बिलों की जांच कर सुधार किया जाए।
- लैम्प्स में पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद उपलब्ध कराई जाए।
- खाद की कालाबाजारी और ओवररेटिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए।
- किसानों को निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराई जाए।
- मृत किसानों के नामांतरण एवं पावती से जुड़ी लंबित प्रक्रियाओं का शीघ्र निराकरण किया जाए।

