खरगोन जिले से संवाददाता अजीज सूफी
खरगोन, सनावद
सन्मति काका ने बताया की इस अवसर पर प्रातः श्रीजी का पंचामृत अभिषेक सामूहिक पूजन कर किया गया। एवम दोपहर मेंआचार्य श्री 108 विप्रणत सागर जी द्वारा रचित सिद्धचक्र मंडल विधान के 120 अर्घ्य समर्पित किए गए ।
प्रशांत चौधरी ने सिद्धचक्र महामंडल विधान की महिमा बताते हुवे कहा की ये आयोजन में सिद्धों की आराधना करने व सिद्ध भगवान के गुण अनुभाव का अवसर हमें प्राप्त हुआ है। सिद्ध भगवान तीनों कर्म मलों से रहित हो गए हैं। देह से रहित अनंत काल तक आनंद में विराजते हैं। उन्होंने कहा कि हम अपने दैनिक जीवन में मन से, वचन से,काय से, गलत काम करना, कराना एवं करने वाले की अनुमोदना करना, क्रोध के कारण, मान के कारण, माया के कारण, लोभ के कारण, किसी गलत कार्य को करने का विचार करना, गलत कार्य करने के साधन जुटाना एवं कार्य को प्रारंभ करना इस प्रकार से कुल 108 प्रकार के पापों का आश्रव करते रहते हैं। इसी कड़ी में रात्री में मंदिर जी सामूहिक भक्ति आरती भी की गई।
इस अवशर पर सुनील पावणा,, सुदेश जटाले,कमल केके, राहुल स्वास्तिक,महावीर जैन, सुधीर चौधरी प्रीति जटाले, अंशुमा सराफ, प्रियंका पंचोलिया, भानु बाई, ,मीना जटाले वर्षा जैन, रेणु जैन, अप्सरा जटाले,सहित अनेक समाजजन उपस्थित थे।
*रथ यात्रा एवं गुरु पूर्णिमा महोत्सव आज*
आज अष्टानिका पर्व के समापन एवं गुरुपूर्णिमा के अवसर बुधवार तीस जुलाई को दोपहर में श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर से श्री जी की रथ यात्रा निकाली जायेगी जो नगर के प्रमुख मार्गो से होकर पुन बड़े मंदिर में समापन होगा जहां श्री जी का पंचामृत अभिषेक एवं गुरु पूजन रात्रि में भक्तामर आराधना संपन्न होगी।
