अरुण कुमार रावत
रात के अंधेरे में भी मशीनों की आवाज सुनाई देती है और बड़ी संख्या में हाईवा वाहन रेत भरकर क्षेत्र से बाहर रवाना होते देखे जा रहे हैं। प्रतिदिन सैकड़ों गाड़ियों के माध्यम से रेत परिवहन किए जाने की बात कही जा रही है। इस कथित अवैध उत्खनन से शासन को राजस्व हानि होने की आशंका है, वहीं पर्यावरण और नदी तंत्र पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह गतिविधियां लगातार जारी हैं, तो संबंधित विभागों द्वारा अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और खनिज विभाग से मांग की है कि डांगरा रेत खदान की तत्काल जांच कराई जाए, मशीनों के उपयोग पर रोक लगाई जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और क्या डांगरा में चल रही इस गतिविधि पर प्रभावी रोक लग पाती है।
दुर्गूकोंदल
कांकेर जिले के दुर्गूकोंदल विकासखंड अंतर्गत ग्राम डांगरा की रेत खदान इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां भारी मशीनों, चैन माउंटेन और पोकलेन के माध्यम से दिन-रात रेत निकाली जा रही है, जबकि रेत खदानों में मशीनों के उपयोग को लेकर स्पष्ट नियम और प्रतिबंध लागू हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर खुलेआम मशीनों से उत्खनन किया जा रहा है।
रात के अंधेरे में भी मशीनों की आवाज सुनाई देती है और बड़ी संख्या में हाईवा वाहन रेत भरकर क्षेत्र से बाहर रवाना होते देखे जा रहे हैं। प्रतिदिन सैकड़ों गाड़ियों के माध्यम से रेत परिवहन किए जाने की बात कही जा रही है। इस कथित अवैध उत्खनन से शासन को राजस्व हानि होने की आशंका है, वहीं पर्यावरण और नदी तंत्र पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह गतिविधियां लगातार जारी हैं, तो संबंधित विभागों द्वारा अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और खनिज विभाग से मांग की है कि डांगरा रेत खदान की तत्काल जांच कराई जाए, मशीनों के उपयोग पर रोक लगाई जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और क्या डांगरा में चल रही इस गतिविधि पर प्रभावी रोक लग पाती है।
