शिक्षा में गुणात्मक सुधार एवं बोर्ड परीक्षा में बेहतर परिणाम हेतु टीचर्स एसोसिएशन ने शासन को दिया ज्ञापन

बोर्ड परीक्षा में अच्छे रिजल्ट के लिए कक्षा 9वीं में प्रवेश परीक्षा से हो दाखिला

कमजोर छात्रों के लिए जिला व ब्लॉक में खुले उपचारात्मक आवासीय स्कूल

 पखांजूर-खराब रिजल्ट को लेकर बालोद में प्राचार्यों को निलंबित करने एवं वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई के बाद शिक्षा व्यवस्था को लेकर बहस छिड़ गई है।शिक्षकों को गैर शिक्षकीय कार्य से पूरी तरह मुक्त रखने समेत शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग उठने लगी है।छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने सचिव स्कूल शिक्षा विभाग व संचालक लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ को पत्र लिखकर बोर्ड परीक्षा में बेहतर परिणाम हेतु 9वीं कक्षा में प्रवेश परीक्षा आयोजित करने और उपस्थिति हेतु कड़े नियम बनाने की मांग की है। 

टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा,संयोजक वाजिद खान,महासचिव हेमेंद्र साहसी,जिलाध्यक्ष स्वदेश शुक्ला,जिला सचिव संतोष जायसवाल,मीडिया प्रभारी कृष्णेंदु आइच ने कहा कि 10वीं और 12वीं कक्षा में बेहतर परीक्षा परिणाम हो इसके लिए युक्तिसंगत और कक्षागत ज्ञान के छात्रों को ही प्रवेश दिया जाये।अभी तक ड्राप आउट रोकने के लिए कक्षा आठवीं के समस्त छात्रों का कक्षा 9वीं में प्रवेश होता है। जिससे 10वीं और 12वीं बोर्ड कक्षा का परीक्षा परिणाम अच्छा नहीं आ पाता है।किसी विद्यालय की बोर्ड परीक्षा परिणाम का प्रतिशत ही पैमाना है तो शैक्षणिक व्यवस्था में जो मात्रात्मक प्रवेश है उसे गुणात्मक सुधार और बोर्ड परीक्षा में बेहतर परीक्षा परिणाम हेतु शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन स्तर पर कुछ कड़े कदम उठाया जाना आवश्यक है
*कक्षा 9वीं में प्रवेश हेतु प्रवेश परीक्षा का हो आयोजन- 
वर्तमान में कक्षा 9वीं में बगैर किसी मापदंड के प्रवेश दिए जाने के कारण शैक्षणिक स्तर में गिरावट देखा जा रहा है।यदि प्रवेश के समय एक प्रवेश परीक्षा आयोजित किया जावे तो केवल वही विद्यार्थी प्रवेश पा सकेंगे जो शैक्षणिक रूप से सक्षम होंगे।इससे कक्षा में प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनेगा जिससे शिक्षकों को औसत से ऊपर के विद्यार्थियों को पढ़ाने एवं और बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार करने में सुगमता होगी।
*पोषित शाला से प्राप्त टीसी मात्र न हो प्रवेश का मानदंड-* पोषित शाला से प्राप्त टीसी  के आधार पर प्रवेश अनिवार्य न किया जाए। इस प्रक्रिया से कक्षा आठवीं तक अनुत्तीर्ण प्रणाली नहीं होने के कारण कमजोर छात्रों का भी कक्षा 9वीं में प्रवेश होता है।

*उपस्थिति के कड़े मानदंड-* यह देखा गया है कि कक्षा आठवीं में नियमित विद्यालय ना आने वाले विद्यार्थियों का भी सीधे कक्षा 9वीं में प्रवेश हो जाता है,कक्षा स्तर के ज्ञान के बिना छात्र हाईस्कूल में पहुंचते हैं जिससे उनकी बुनियादी समझ अधूरी रह जाती है। अतः कक्षा आठवीं में न्यूनतम 75% उपस्थिति अनिवार्य की जावे।
*बोर्ड परीक्षा परिणाम में सुधार-* जब प्रवेश के स्तर पर ही छंटनी की जाएगी तो हाईस्कूल स्तर पर शिक्षकों को ऐसे विद्यार्थी प्राप्त होंगे जिनका आधार मजबूत होगा एवं कक्षा स्तर का ज्ञान होने से अंततः दसवीं और बारहवीं बोर्ड कक्षा के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार होगा और विद्यालय का शैक्षणिक स्तर ऊंचा उठेगा।
*कमजोर विद्यार्थियों हेतु उपचारात्मक स्कूल -* 8वीं कक्षा के कमजोर विद्यार्थियों को चिन्हांकित कर उपचारात्मक शिक्षण प्रदान करने हेतु जिला एवं ब्लाक मुख्यालय में स्पेशल उपचारात्मक स्कूल खोलकर अलग से शिक्षकों की व्यवस्था कर अध्यापन कराया जावे।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन कांकेर के जिला पदाधिकारी निरंकार श्रीवास्तव, प्रकाश चौधरी,ललित नरेटी,रामदयाल आंचले,हेमंत श्रीवास्तव,डुमेंद्र साहू,राजेन्द्र खुड़श्याम,पुरुषोत्तम सोनवंशी, विकासखण्ड अध्यक्ष भोला प्रसाद ठाकुर,गोरखनाथ ध्रुव,बोधन साहू, सत्यनारायण नायक सहित अन्य पदाधिकारियों ने व्यापक छात्रहित और शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए कक्षा 9वी में प्रवेश हेतु अनिवार्य प्रवेश परीक्षा एवं उपस्थित संबंधी कड़े नियम लागू करने संबंधी आदेश जारी करने की मांग की है।

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