चंदेरी संत सेन जी महाराज मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के प्रसिद्ध संतों में से एक थे। वे सरल भक्ति सेवा और समानता के संदेश के लिए जाने जाते थे।
आपका जन्म लगभग 14वीं 15वीं शताब्दी में परंपरा के अनुसार बांधवगढ़ क्षेत्र वर्तमान मध्य प्रदेश माना जाता है। वे समाज में सेवा कार्य करते हुए भक्ति भावना का संदेश देते थे। संत सेन जी महान संत रामानंद के शिष्य माने जाते उन्होंने भक्ति में जाति भेद का विरोध किया।उनका मानना था कि सच्ची भक्ति मन की शुद्धता और सेवा से होती है।
आज़ महान् संत शिरोमणि सेन जी महाराज की सेन समाज द्वारा जयंती मनाई गई सेन समाज मंदिर से भव्य चल समारोह जिसमें सेनजी महाराज की छाया प्रति और चलसमारोह में बग्गी घोड़ों पर समाज के प्रतिष्ठित लोगों को बिठा कर शहर के मुख्य मार्गों से चल समारोह निकाला गया जिसका समापन सेन समाज के मंदिर पर हुआ जहां प्रसादी भंडारे के साथ संपन्न हुआ।सेन समाज के मंजू सेन,बसंत याज्ञनिक प्रताप मौकम रतिराम लालाराम जो घोड़े पर सवार होकर प्रतिष्ठित गणमान्य नागरिक होने का प्रमाण दे रहे थे।
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