पखांजूर
कॉ पुष्पा जुर्री श्रद्धांजलि सभा संपूर्ण गरिमा के साथ संपन्न
गत 2 अक्टूबर को सहायिका कॉ पुष्पा जुर्री का 34 वर्ष की उम्र में हृदय गति रुक जाने के कारण अचानक दुःखद निधन हो गया। वे संघर्षशील आंगनबाड़ी यूनियन की निडर, कर्मठ और निष्ठावान नेतृत्वकारी सदस्य थी। संघर्षशील यूनियन के द्वारा रविवार 11 अक्टूबर पखांजूर में एक स्मृति सभा का आयोजन किया गया।
सभा में सलाहकार कॉ विश्वजीत हारोडे, कॉ पथिक अधिकारी, यूनियन अध्यक्ष कॉ कल्पना चंद सहित तृप्ति वर्मा, सुखबती नेताम, रत्ना शील, पूर्णिमा साहा व बिहान यूनियन अध्यक्ष कॉ पदमा पाटिल ने संबोधित किया। सभा का संचालन कॉ सलमा बोगा ने किया।
सलाहकार कॉ विश्वजीत हारोडे ने कहा कि कॉ पुष्पा जुर्री एक सहायिका थी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका बहुत कम मानदेय में काम करती हैं। घर चलाना बहुत मुश्किल होता है। इस कारण ये गरीब सहायिकाएं अपने स्वास्थ्य और इलाज पर खर्च नहीं कर पाती हैं। वे नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। एक ओर हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था एवं दूसरी ओर शासन के द्वारा दिया जाने वाला अल्प मानदेय काॅमरेड पुष्पा जुर्री की मृत्यु का कारण बना। जबकि आंगनबाड़ी आंदोलन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी वह यूनियन के तमाम आंदोलन में आंगनबाड़ी के तमाम आंदोलन में आगे रहती थी।
अध्यक्ष कल्पना चंद ने कहा कि पुष्पा एक निडर व साहसी महिला थी। वह इस क्षेत्र की पहली सहायिका थी जिस जिन्होंने सहायिकाओं की समस्याओं को उठाया और आंदोलन में जोरदार नेतृत्वकारी भूमिका अदा की।
शुरुआत में उनकी फोटो पर फूल चढ़ाकर 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। कॉ पुष्पा के मासूम बच्चों को यूनियन की ओर से आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया। भविष्य में भी उनके बच्चों की देखभाल में सहयोग करने का संकल्प लिया गया।
दुःख के साथ
कल्पना चंद
अध्यक्ष, संघर्षशील आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका यूनियन

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