संस्कृत सप्ताह दिवस का बेहतरीन आयोजन : स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खलारी में...

 ब्यूरो समाचार -दिनेश कुमार नेताम, 6261807595 

स्थान - खलारी 

स्कूल शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन के आदेशों का परिपालन करते हुए दिनांँक 6 अगस्त 2025 से 12 अगस्त 2025 तक बहुत ही गरिमामयी शिक्षक, पालक एवं छात्रों की उपस्थिति में हर्षोल्लास और आनंदमयी वातावरण के साथ संस्कृत भाषा सप्ताह का आयोजन संस्था के संस्था प्रमुख श्रीमती एस. जॉनसन प्राचार्य के संरक्षण एवं दिशा निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम की रूपरेखा अनुसार पूरे सप्ताह भर का अलग-अलग दिवसों पर समयानुसार कार्यक्रम का क्रियान्वयन हुआ। 

भारतीय संस्कृति एवं शाला परिवार विधान अनुसार विद्या की देवी मांँ सरस्वती के तैल्य चित्र पर दीप प्रज्वलित कर संस्कृत मंत्रोच्चारण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। सरस्वती वंदना बहुत ही सुमधुर सुस्वर कंठ ध्वनि के साथ कु. गोमती, कल्पना एवं साथी के द्वारा गायन किया गया जो सभी को मंत्रमुग्ध कर दिये।

अतिथियों के उद्बोधन पश्चात संस्कृत साहित्य, संबंधित ग्रंथ व संस्कृत से संबंधित आकर्षक प्रदर्शनी पोस्टर, चित्रकला, नारा प्रदर्शनी पोस्टर का आयोजन किया गया ।


संस्था के संस्था प्रमुख प्राचार्य के द्वारा संस्कृत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए विचार अभिव्यक्ति किया गया जैसे संस्कृत से प्रभावित है भारतीय संस्कृति ...सभी भाषाओं की जननी है...संस्कृत पढ़ने से लाभ... संस्कृत, संस्कृति और संस्कार... संस्कृत भाषा नैतिक मूल्यों की भाषा है ऐसे यथार्थ वाक्यों पर भाष्य को प्रस्तुत किया गया। 


कु. तुलसी खरे कक्षा दसवीं के छात्रा द्वारा पूरा सप्ताह का संस्कृत वाचन बहुत ही गंभीरता और सूझ-बूझ के साथ किया गया जिसमें यह कहा गया कि संस्कृत भाषा हमारे प्राचीनतम भाषा है, देवों की भाषा है जो अन्य सभी भाषाओं की जननी है साथ ही बहुत ही विशुद्ध, परिष्कृत एवं परिमार्जित भाषा है जिसे सरलता एवं सहजता से वाचन करने में आसानी होता है। संस्कृत केवल भाषा नहीं है; बल्कि हमारी भारतीय संस्कृति को जन्म देती है और घर-परिवार समाज, देश में संस्कार का निर्माण करती है। इसलिए संस्कृत भाषा का संरक्षण और संवर्धन हम मानव समाज का एक महत्वपूर्ण एवं जिम्मेदारी दायित्व बनता है। संस्कृत भाषा का ज्ञान जैसे अमूल्य निधि को जन-जन तक पहुंचाएँ। पुरातन काल में इसका प्रयोग किसी भी वस्तु, विचार या भाषा की संस्कृत रूप के लिए किया गया बाद में संस्कृत विशेष रूप से उस भाषा के लिए प्रसिद्ध हुआ जो वैदिक और शास्त्र की भाषा हुई।

कु. दीपिका एवं कु. मीनू कक्षा ग्यारहवीं के छात्राओं द्वारा श्लोको का सस्वर वाचन, संस्कृत संभाषण, संस्कृत सुभाषित श्लोक एवं उनके अर्थ बताना संस्कृत पाठ्य पुस्तकों पर आधारित संकल्प नाटकों का मंचन कर लोगों को संस्कृत आज के भौतिक परिस्थितियों में कितना महत्वपूर्ण है इसका हिंदी अनुवाद सारगर्भित शब्दों में किया गया। 


राज्यपाल पुरस्कृत गणित के व्याख्याता धर्मेंद्र कुमार श्रवण ने संस्कृत सप्ताह भाषा सप्ताह मनाने का कारण गंभीर विचारों के साथ भाव रखें और उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा वेद, उपनिषद, पुराण आदि ग्रंथ संस्कृत भाषा पर ही लिखा गया।

और संस्कृत भाषा दिवस रक्षाबंधन के दिन ही मनाए जाने का कारण बताया गया। संस्कृत व्याकरण से संबंधित कारक रचना, धातु रचना, वचन, प्रत्यय, उपसर्ग, लिंग, लकार आदि पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। संस्कृत पर अनुवाद कैसे किया जाता है इस पर अपना विचार प्रस्तुत किया गया कि इसका अनुवाद अंग्रेजी और हिंदी की तरह न होकर अपने आप में स्वतंत्र है बशर्तें कारक रचना और धातु रचना पर युग्म संयोजन व समन्वय बेहतरीन तरीके से हो और बहुत ही आसान तरीकों से अनुवाद करने सूत्र बताया गया। वाचन के अंत में विद्यार्थी के पाँच सफलता मूलमंत्र को संस्कृत भाषा को हिंदी में बहुत ही सुंदर प्रस्तुत किया गया।साथ ही संस्कृत के महाकवि महर्षि कालिदास, महर्षि पाणिनी, वेदव्यास, महर्षि वाल्मीकि जैसे संस्कृत के विद्वानों के कृति पर प्रकाश डाला गया ।


इस तरह से कक्षा दसवीं में सबसे अधिक संस्कृत विषय पर अंक अर्जित करने वाले एवं शाला का नाम रोशन करने वाले छात्रा कु. गुंजा को संस्था के संस्था प्रमुख प्राचार्य जी के करकमलों द्वारा गीता पुस्तक भेंट कर सम्मान किया गया।


संस्कृत सप्ताह के अंतिम दिवस पर संस्कृत व्याख्याता संजय कुमार खरे जी के द्वारा विद्यालय स्तर पर पूर्व संपादित गतिविधियों का संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण करते हुए नारों से गुंजायमान करने में सफल रहे.. ग्रामे-ग्रामे संस्कृत भाषा..., नगरे-नगरे संस्कृत भाषा..., संस्कृत भाषा सरला भाषा.., मधुरा भाषा संस्कृत भाषा... एवं संस्कृत भाषा पर अपना सारगर्भित विचार एवं सस्वर श्लोक वाचन प्रस्तुत किया गया।


कार्यक्रम के समापन एवं अंतिम दिवस पर संस्था के हिंदी प्रकोष्ठ विभाग से गोवर्धन सिंह कोर्राम ने अपने विचार रखा और संस्कृत भाषा की इतिहास को वैदिक संस्कृत, शास्त्रीय संस्कृत एवं उत्तर कालीन संस्कृत पर संस्कृत सारगर्भित एवं आधुनिक विचारको का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए भावनाओं को उकेरने में सफलीभूत हुए।

संस्था के संस्कृत भाषा के शिक्षिका श्रीमती सरिता उर्वशा ने कालिदास के रचनाओं को संस्कृत भाषा में गीत के माध्यम से प्रस्तुत किया गया और भावों को सरोबोर करते हुए तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान करती रही ..। पूरे कार्यक्रम का संचालन संजय कुमार खरे जी के द्वारा एवं नेतृत्व में भी सक्रियता पूर्ण निर्वहन के साथ किया गया। सेजेस खलारी के वरिष्ठ शिक्षकवृंद भीमा भारती खोबरागढ़े, भूमिका देवी पाटिल, सरोज सिंह, भीखम सिंह रावटे, व्यायाम मार्गदर्शक शिव वैदे, मनमोहन सिंह धाकड़, डोमेन्द्र कुमार राणा, सरिता यादव प्रियंका भट्ट , यामिनी साहू , जागेन्द्र अमरिया , नवनियुक्त शिक्षक एवं समस्त शिक्षक उपस्थित रहे...।



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