सबसे पहले मां, फिर बाकी दो को मारा, तीन मर्डर की कहानी, दो आरोपी गिरफ्तार

जिला ब्यूरो कपिल भार्गव    

 गुना              

मौत के घाट उतार दिया। सबसे पहले मां को गला दबाकर मारा। इसके बाद उस व्यक्ति की हत्या की, जिसके साथ उसकी मां आपत्तिजनक हालत में थी। अंत में वहां मौजूद तीसरे व्यक्ति की भी हत्या कर दी। हत्या से पहले सभी ने शराब पी थी। मर्डर के बाद जिन दोनों कमरों में शव थे, उनमें ताले लगाकर तीनों आरोपी फरार हो गए। पहले मामला जान लीजिए... बता दें कि रविवार सुबह गुना जिले की म्याना थाना पुलिस को सूचना मिली। कॉल करने वालों ने बताया कि हनुमान मंदिर के पास स्थित एक घर से बहुत तेज बदबू आ रही है। सूचना मिलते ही म्याना पुलिस मौके पर पहुंची। घर के जिस कमरे से बदबू आ रही थी, उसका ताला तोड़कर अंदर घुसी, तो वहां एक शव पड़ा हुआ था। शव बुरी तरह सड़ चुका था। जिस घर में शव मिला, वो ओमप्रकाश शर्मा (57) का था। उनके भतीजे और अन्य रिश्तेदार भी वहां पहुंच गए। भतीजे और अन्य लोगों ने मिलकर शव की शिनाख्त ओमप्रकाश शर्मा के रूप में की। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया। यहां पीएम के बाद शव परिवार वालों को सौंप दिया गया। परिवार वाले शव को म्याना ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया। दूसरे दिन फिर मिले दो शव पुलिस उस एक मौत की गुत्थी में उलझी हुई थी। सोमवार सुबह जांच के लिए पुलिस की एक टीम वापस ओमप्रकाश के घर पहुंची। वहां एक कमरे में ताला लगा हुआ था। पुलिस उसे खोलकर अंदर घुसी, तो भौचक्की रह गई। उस कमरे में दो और शव पड़े हुए थे। इनमें एक पुरुष और एक महिला का शव था। ये दोनों शव भी सड़ चुके थे और बहुत तेज बदबू आने लगी थी। एक शव की गुत्थी सुलझ नहीं पाई थी कि दो और शव उसी घर में मिले। FSL, डॉग स्क्वॉड, खुद SP मौके पर पहुंचीं दो दिन में तीन शव मिलने पर ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए खुद SP हितिका वासल मौके पर पहुंचीं। शवों से इतनी तेज बदबू आ रही थी कि पुलिसकर्मी दो दो मास्क लगाकर मौके पर पहुंचे। उनके अलावा FSL की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। वहीं डॉग स्क्वॉड ने भी मौके पर मुआयना किया। SP ने इन तीन हत्याओं की गुत्थी सुलझाने के लिए कई टीमों का गठन किया। पोस्टमार्टम के दौरान फिर फंसा पेंच पुलिस ने इन दोनों शवों को भी पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया। पूछताछ में पुलिस को पता चला कि विंदा बाई निवासी बदरवास लगभग ढाई महीनों से ओमप्रकाश के साथ रहती थी। उसके अलावा रामकिशन जाटव निवासी कोलारस अक्सर वहां आता जाता रहता था। इसके बाद पुलिस ने इन दोनों को बच्चों को अस्पताल बुलवाया। विंदा बाई के लड़के ने तो उसकी शिनाख्त कर दी, लेकिन रामकिशन के बेटे ने कहा कि ये उसके पिता का शव नहीं है। पुलिस इसी सोच में पड़ गई कि अगर ये तीसरी बॉडी रामकिशन की नहीं है, तो किसकी है। पुलिस ने ओमप्रकाश के बेटे को बुलवाया और वो बॉडी दिखाई। उसके बेटे ने कहा कि ये तो उसके पिता का शव है। उसने पैरों और मृतक के गले की चेन से शिनाख्त करते हुए कहा कि ये पक्का उसके पिता की ही बॉडी है। इसके बाद साफ हुआ कि रविवार को जिस शव को ओमप्रकाश का समझकर अंतिम संस्कार कर दिया गया, वो शव दरअसल रामकिशन का था। CCTV से मिला पहला क्लू SP के निर्देशन में तीन चार टीमें काम कर रही थीं। एक टीम CCTV और तकनीकी साक्ष्य जुटाने में लगी थी। इसी दौरान 18 जून को म्याना में कलारी के पास लगे CCTV में एक संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिया। पुलिस ने उसे राउंड अप किया, तो वह मृतिका विंदा बाई की बहन का लड़का सुरेन्द्र जाटव निवासी शाहपुर थाना म्याना निकला। पुलिस ने उसे पूछताछ की। साथ ही विंदा बाई के लड़के सीताराम जाटव से भी जानकारी ली। उन दोनों की बातों में विरोधाभास हुआ। सख्ती से पूछताछ की तो टूटे दोनों की बातें मेल नहीं खा रही थीं। जब पुलिस ने दोनों से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गए। उन्होंने अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर तीनों हत्याएं करना स्वीकार कर लिया। उन्होंने बताया कि विंदा बाई के ओमप्रकाश से अवैध संबंध थे। इसी कारण नाराज हो कर और ओमप्रकाश की संपत्ति हड़पने के लालच ने तीनों का मर्डर कर दिया। सबूत छिपाने के उद्देश्य से शव अलग अलग कमरों में रख दिए। पुलिस ने आरोपी सीताराम जाटव (32) और उसकी मौसी के लड़के सुरेन्द्र (27) को गिरफ्तार कर लिया है। तीसरे फरार आरोपी की तलाश की जा रही है। सबसे पहले तीसरा आरोपी पहुंचा वारदात 18 जून को हुई। ओमप्रकाश, विंदा बाई और रामकिशन म्याना के उसी मकान में थे। सबसे पहले तीसरा आरोपी पहुंचा। ये सभी लोग मिलकर शराब पीने लगे। कुछ समय बाद सुरेन्द्र पहुंचा। वो भी उन सब के साथ मिलकर शराब पीने लगा। रात लगभग 9 बजे सीताराम इस घर में पहुंचा। वह पहले से ही बदरवास से ही शराब पी कर आया था। मां को समझाने लगा मौके पर कुल छह लोग हो गए थे। सभी शराब के नशे में थे। इसी दौरान सीताराम अपनी मां को समझाने लगा कि ये सब काम बंद कर दे। उसकी मौसी के लड़के सुरेन्द्र ने भी कहा कि बहुत बदनामी हो रही है। पूरे समाज में थू थू हो रही है। लोग पता नहीं क्या क्या बातें कर रहे हैं। इसी कारण से कुछ दिन पहले सीताराम की पत्नी भी इसे छोड़कर चली गई थी। इस कारण वह भी नाराज था। इसी बीच ओमप्रकाश और विंदा बाई पास वाले कमरे में चले गए। तभी


सीताराम वहां पहुंच गया और उन दोनों को आपत्तिजनक हालत में देख लिया। उन्हें देखते ही सीताराम गुस्से में आगबबूला हो गया और अपनी मां की गला दबाकर हत्या कर दी। तब तक रामकिशन और बाकी दो लोग भी वहीं पहुंच गए। इसके बाद ओमप्रकाश और रामकिशन की भी गला दबाकर हत्या कर दी। सभी ने ओमप्रकाश और बिंदाबाई के शव को एक कमरे में रखा और बाहर से ताला लगा दिया। रामकिशन के शव को दूसरे कमरे में छोड़ बाहर से ताला लगाकर रात लगभग 10:30 बजे तीनों वहां से भाग निकले

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