दिनेश कुमार सेन
ईसागढ़
शासन द्वारा नरवाई जलाने पर सख्त प्रतिबंध के बावजूद क्षेत्र में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। खेतों में लगातार नरवाई जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार बीते कुछ दिनों से अलग-अलग स्थानों पर नरवाई जलाई जा रही है। दिनभर उठता धुआं आसपास के क्षेत्रों में फैलकर प्रदूषण बढ़ा रहा है। इससे आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन मौके पर रोकथाम के ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं।
मामले के उजागर होने के बाद SDM त्रिलोचन गौड़ ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, “नरवाई जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और जल्द ही टीम भेजकर जांच करवाई जाएगी। दोषी किसानों के खिलाफ जुर्माना एवं नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
विशेषज्ञों के अनुसार नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता कम होती है, जमीन के उपयोगी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और वातावरण में हानिकारक गैसों का उत्सर्जन बढ़ता है। इसके अलावा धुएं के कारण सांस संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे आमजन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
गौरतलब है कि प्रदेशभर में नरवाई जलाने के मामलों को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है और सैटेलाइट के माध्यम से भी निगरानी की जा रही है। इसके बावजूद क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं सामने आना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
अब देखना होगा कि SDM के निर्देशों के बाद संबंधित विभाग कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और क्या वास्तव में इन घटनाओं पर अंकुश लग पाता है या नहीं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल निर्देश ही नहीं, बल्कि मौके पर सख्त कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
