अध्यापक- शिक्षक संयुक्त मोर्चा ईसागढ़ ने लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम एस डी एम द्वारा तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन।

ईसागढ़ 

अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर शनिवार को रेस्ट हाउस ईसागढ़ में अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में सैकड़ों शिक्षकों की संख्या में एकत्रित समस्त शिक्षकों ने एकजुट होकर विशाल बाइक रैली निकाली जो रेस्ट हाउस से अनु विभाग कार्यालय तक पहुंची जहां शिक्षकों ने करीब 700 मीटर से ज्यादा पैदल चल कर मुख्यमंत्री के नाम  अपनी लंबित एवं न्यायोचित मांगों के संबंध में अनु विभागीय अधिकारी द्वारा तहसीलदार अरुण गुर्जर को ज्ञापन सौंपा। यह आंदोलन प्रदेशभर में शिक्षकों के बढ़ते असंतोष और न्याय की अपेक्षा का प्रतीक बनकर उभरा। ज्ञापन में प्रमुख रूप से यह मुद्दा उठाया गया कि सर्वोच्च न्यायालय एवं राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों के बावजूद प्रदेश के नॉन टीईटी शिक्षकों पर टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता थोपना न्यायसंगत नहीं है। एनसीटीई की 10 अगस्त 2010 की अधिसूचना में स्पष्ट प्रावधान है कि पूर्व में नियुक्त शिक्षकों एवं विशेष परिस्थितियों में कार्यरत शिक्षकों को टीईटी से छूट प्रदान की गई है।प्रयागराज उच्च न्यायालय ने भी यही व्याख्या की है कि पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को इसके दायरे में नहीं लिया जा सकता। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर जारी आदेशों के माध्यम से शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए बाध्य किया जाना न्यायालयीन भावना एवं विधिक प्रावधानों के विपरीत है। यह स्थिति न केवल शिक्षकों के अधिकारों का हनन है, बल्कि उन्हें अनावश्यक मानसिक तनाव में भी डाल रही है।



मोर्चा द्वारा यह मांग रखीं गई -


टीईटी की अनिवार्यता को तत्काल समाप्त किया जाए। सरकार संवेदनशील ढंग से उच्चतम न्यायालय में रिव्यू पिटिशन फाईल करे। तथा केन्द्र सरकार से अध्यादेश लाकर इस विसंगति को दूर करे। सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए, जिससे शिक्षकों को पेंशन, ग्रेच्युटी एवं अन्य वैधानिक लाभ मिल सकें। नवीन संवर्ग के शिक्षकों के साथ हो रहे भेदभाव को समाप्त कर समानता का सिद्धांत लागू किया जाए।कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि न्याय सिद्धांत के अनुसार कोई भी नियम पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता। अतः वर्षों पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर वर्तमान नियम लागू करना न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि संवैधानिक भावना के भी विपरीत है। तहसीलदार ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना एवं उचित माध्यम से शासन स्तर तक प्रेषित करने का आश्वासन दिया। मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं तीव्र किया जाएगा। साथ ही यह भी संकल्प लिया गया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में इसी प्रकार के संगठित एवं प्रभावी आंदोलन जारी रहेंगे। भोपाल में प्रस्तावित आगामी 18 अप्रेल को होने वाले प्रादेशिक आंदोलन में सारे प्रदेश के शिक्षक उग्र स्वर में अपनी बात सरकार के समक्ष रखेंगे । अंत में मोर्चा ने सभी शिक्षकों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने भारी संख्या में उपस्थित होकर इस आंदोलन को सफल बनाया और आगे भी निरंतर सक्रिय रहने का संकल्प दोहराया। इस दौरान मातृशक्ति की संख्या भी अधिक रही जो इस रैली में शामिल रही जमकर नारेबाजी की।

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