राज्य स्तरीय कला उत्सव में वनांचल स्कूल खलारी का लघु नाटिका का शानदार प्रदर्शन

संवाद दाता - शांतनु कुलदी


 स्थान- रायपुर 

कला उत्सव स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा राज्य स्तरीय कला उत्सव वर्ष 2025 कार्यक्रम का आयोजन जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान शंकरनगर रायपुर में समग्र शिक्षा के सौजन्य से संपन्न हुई कला उत्सव महोत्सव में पूरे राज्य भर के सभी शालेय बाल कलाकारों की उपस्थिति रही।

  कला उत्सव का प्रमुख उद्देश्य माध्यमिक स्तर की विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा को पोषित एवं प्रस्तुत करना है। विद्यालय, जनपद, जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर यह वार्षिक आयोजन विद्यार्थियों को भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विविधता को समझने तथा उसे उत्सव के रूप में मनाने का मंच प्रदान करता है।


यह आयोजन केवल एक बार होने वाले कोई गतिविधि न होकर विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा को पहचानने, खोजने, समझने और उसके अभ्यास विकास और उसे प्रसिद्ध करने की एक व्यापक प्रक्रिया है इस उत्सव में प्रतिभागी न केवल अपनी सांस्कृतिक परंपराओं की विभिन्न कला स्वरूप को प्रदर्शित करते हैं बल्कि इस अनुभव का आनंद उठाते हुए एक भारत श्रेष्ठ भारत की अवधारणा में भी योगदान देते हैं इस प्रकार कला उत्सव विद्यार्थियों की कलात्मक अधिकारों का पोषण करने उसकी संस्कृत समाज को बढ़ावा देने तथा भारत की सांस्कृतिक परंपरा को विद्यार्थियों में प्रचलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा के माध्यम से कला और संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर देती है भारतीय संस्कृति और दर्शन का दुनिया पर गहरा प्रभाव रहा है वैश्विक महत्व की समृद्धि विरासतों को न केवल भावी पीढ़ी के लिए पोषित और संरक्षित किया जाना चाहिए, बल्कि हमारी शिक्षा प्रणाली के माध्यम से शोध संवर्धन और नए प्रयोग में भी लाया जाना चाहिए। कला उत्सव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रमुख अवधारणाओं के रूप में है जो समग्र और व्यापक शिक्षा को बढ़ावा देने में इसके महत्व को दर्शाती है और इस वर्ष कला उत्सव की मुख्य विषय वस्तु *विकसित भारत वर्ष 2047 के भारत की परिकल्पना* के अंतर्गत 12 विधाओं में वर्गीकृत किया गया जिसमें सेजेस खलारी के बाल कलाकारों के द्वारा नाट्यकला एवं लोक नृत्य लेकर कक्षा 9वी एवं 10वीं के छात्राओं के द्वारा नाट्यकला के अंतर्गत *एक पेड़ मांँ के नाम* पर लघु नाटिका का लेकर मंच पर बेहतरीन प्रदर्शन कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया गया । 

नाटक का स्वरूप प्रदान करने वाले राज्यपाल पुरुस्कृत गणित व्याख्याता श्री धर्मेंद्र कुमार श्रवण जी के दिशा-निर्देशन एवं मार्गदर्शन पर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी के द्वारा पर्यावरण दिवस के अवसर पर *एक पेड़ मांँ के नाम* विषय को लेकर घोषणा की और और पूरे देश भर में यह अभियान चलाया गया इसी शीर्षक पर श्रवण जी के द्वारा कक्षा नवमी के छात्रा कल्पना, हिमांशी, ओजस्वी, एवं कक्षा दसवीं से दामिनी सहित बाल कलाकारों द्वारा नाट्य प्रदर्शन का बहुत ही सुंदर एवं बखूबी से प्रस्तुति कर वृक्ष मांँ, कोतवाल, लकड़हारा एवं विद्यार्थी की भूमिका पर खरे उतरकर सफलीभूत हुए । इस कार्यक्रम में श्रीमती भीमा भारती खोब्रागड़े मैडम के भी अहम सहभागिता रही।



कला उत्सव के थीम *विकसित भारत वर्ष 2047 के भारत की परिकल्पना* तभी सार्थक होगी जब तक मानव समाज पर्यावरण संरक्षण, देखरेख एवं स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण घटकों पर ध्यान जाग्रत करना होगा और गाँवों से लेकर शहरों तक आनेवाले पीढ़ी के लिए भविष्य में सँवारना होगा .. इसी विषय को सफलीभूत करते हुए *एक पेड़ मांँ के नाम* जो कि छत्तीसगढ़ के हसदेव जंगल की धड़ल्ले से कटाई हो रहे एवं आम नागरिकों के जनजीवन की कहानी को लेकर सार गर्भित विचार को समाहित कर समस्याओं का निदानात्मक उपाय एवं निराकरण हेतु नाटक तैयार किया गया। लोगों में जन-जागरूकता लाने की दृष्टिकोण से स्थानीय छत्तीसगढ़ी भाषा पर बहुत ही मनमोहक प्रस्तुति दी गई। दर्शकों की दिल को जीत लिया और मंच को तालियों की गड़गड़ाहट से उत्साह वर्धन करते रहे। इस तरह से नाटक के माध्यम से यह सीख दी गई कि पौधेरोपण से ही धरती को सुखी होने से बचाना और हरा-भरा पावन धरा को विभूषित करने के लिए *एक पेड़ माँ के नाम* से पेड़ लगाने की अनिवार्यता को स्वरुप प्रदान करते हुए मांँ की तरह ही स्नेह मिल सकें और शुद्ध प्राण वायु ऑक्सीजन मिल सकें। आने वाले विकट समस्याओं से निजात पाने के लिए और पर्यावरण को सुरक्षित एवं हरित ऊर्जा प्रदान करने के लिए पेड़ की महत्ता एवं उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए लोगों में जनजागरुकता लाना इस लघु नाटिका मुख्य उद्देश्य रहा है और अपने जीवन पर इस अमूल्य धरोहर को आत्मसात करना नितांत आवश्यक है; नहीं तो आने वाला भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। इसलिए जीवन रहते वृक्षारोपण करना अति आवश्यक है तभी *विकसित भारत वर्ष 2047 के भारत की परिकल्पना* का सपना साकार होगा ।


राज्य स्तरीय कला उत्सव 2025 के प्रस्तुतिकरण पर हर्ष व्यक्त करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी बालोद, संस्था के प्राचार्य श्रीमती एस जॉनसन, बीईओ चतुर्वेदी जी, बी आर सी सी शर्मा जी वरिष्ठ व्याख्याता गण पाटिल मैम, भीखम सिंह रावटे, गोवर्धन सिंह कोर्राम, मनमोहन सिंह धाकड़, डोमेन्द्र सिंह राणा, शिवराम वैद्य एवं समस्त शिक्षक गण बधाईयांँ एवं शुभकामनाएंँ संप्रेषित किये है।




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