ब्यूरो समाचार, दिनेश कुमार नेताम, बालोद
रायपुर,17 जून 2025। आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ में गुंडों और चाकूबाजों का सुशासन चल रहा है। जब राजधानी रायपुर में आम आदमी सुरक्षित नहीं है तो प्रदेश की क्या स्थिति होगी। कहीं भी सरेआम चाकूबाजी हो रही है, तोमर भाईयों द्वारा गुंडागर्दी और ब्याज पर पैसा देकर जमीन हड़पना इतने दिनों से चल रहा था, तो क्या उन्हें नेताओं और पुलिस अधिकारियों का सरंक्षण था? और क्यों अभी तक उनकी गिरफ़्तारी नहीं हो पायी है? राज्य में मंत्री, नेता और अधिकारी सिर्फ कार्यक्रमों में व्यस्त हैं जबकि प्रदेश की कानून व्यवस्था ख़राब है।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश सोशल मीडिया और मीडिया प्रभारी, मुख्य प्रवक्ता सूरज उपाध्याय ने बताया कि राजनांदगांव में रेत माफिया द्वारा की गई गोलीबारी और अनेक जगहों पर रेत खनन में दादागिरी विष्णु के सुशासन की वास्तविक हकीकत है। भाजपाई सत्ताधीशों के संरक्षण में पूरे प्रदेश में रेत खनन के आतंक का खूनी खेल खेल रहा है। भाजपा के मंत्री, विधायक, नेता, रेत के अवैध कारोबार के भागीदार बने हुये है। अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित कर सत्तारूढ़ दल के नेता रेत माफिया की दादागिरी को प्रश्रय देते है। रेत घाटो के क्षेत्र के ग्रामीण और पंचायत कर्मचारी खनिज कर्मचारी बेबश और लाचार बन गये है। और जब कोई पत्रकार इसको उजागर करना चाहता है तो उसे दौड़ा दौड़ाकर पीटा जाता है। बलौदाबाजार में रेत माफिया एक व्यक्ति को खंभे से बांधकर सिर्फ इसलिए पीटते हैं, क्योंकि उस पर माइनिंग अधिकारियों के लिए मुखबिरी करने का शक था।
पिछले दिनों बलरामपुर जिले के लिबरा गांव में रेत माफियाओं ने एक आरक्षक पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया था, जिससे सनवाल थाने के आरक्षक शिव बच्चन सिंह की मौत हो गई थी। गरियाबंद के खनिज इंस्पेक्टर सहित माइनिंग विभाग के अधिकारी कर्मचारियों को रेत माफिया के गुर्गों के द्वारा बेरहमी से पीटा जाता है। धमतरी, राजिम और महासमुंद की घटनाएं भी सर्वविदित है। राजधानी रायपुर से लगे आरंग, समोदा, हरदीडीह में भी धड़ल्ले से रेत का अवैध उत्खनन चालू है। हरदीडीह में तो खनिज विभाग के 16 अधिकारी, कर्मचारियों को रेत तस्करों के गुंडो ने दौड़कर लाठी डंडों से पिटा। पिछले साल अवैध रेत खदानों और रेत के अंतर्राज्यीय तस्करी की स्टोरी बनाने मौके पर पहुंचे पत्रकार बप्पी राय सहित चार पत्रकारों की गाड़ी में गांजा रखवा कर उल्टे उन्हें ही जेल भेज दिया गया, शिकायत करने पर कोटा थाना प्रभारी में सीसीटीवी फुटेज गायब कर दिया। रेत तस्करों का मनोबल इतना बड़ा हुआ है कि अब विरोध करने वाले पत्रकार और पुलिस वालों पर भी हमला कर रहे हैं खुलेआम फायरिंग कर रहे हैं।
बीते 17 महीना में रेत के दाम 8-9 गुना महंगे हो गए जितने भी अधिकृत तौर पर खदानें हैं, उनसे 5-7गुना अधिक अवैध खादाने संचालित है। केंद्रीय पर्यावरण विभाग के आदेशों की खुली अवहेलना करके रेत खदानों में अवैध तरीके से रेत निकाला जा रहा है। खदानों में इस सरकार ने बंद कर दिया। लोडिंग का रेट 500 रूपये है जिसकी जगह 5000 रूपये ले रहे हैं, रॉयल्टी का रेट 650 रूपये है जिसकी जगह 3000 रूपये ले रहे हैं खदान के बाहर कांटा लगाना वैब्रिज ताकि बिना वजन के रेत ना जाये,कैमरा लगाना है ताकि बिना रॉयल्टी के कोई गाड़ी बाहर नहीं जाये, जीएसटी बिल काटना है,बोर्ड चस्पा करना है, रेट खदान किसके नाम पर है, कितनी एरिया में है, कंसलटिंग ऑफिसर कौन है, कितनी रेत निकालना है,कितने दिनों का ठेका है, ये सारी चीजों का उल्लंघन सरकार खुद करवा रही है जब रेत का उत्खनन नहीं होगा तो परिवहन कैसे होगा। जब नदी के नजदीक के किनारे जितने भी गांव हैं वह पंचायत, जनपद पंचायत और जिला पंचायत खनन के एनओसी देतें है तो उनके एरिया से रेत इतनी निकल कैसे रही है इसका मतलब है की जनप्रतिनिधि इसमें इन्वॉल्व हैं। और अगर सरकार इतनी ईमानदार है तो खदान से से एसडीएम के जरिये 500 और 650 की पर्ची दिखाकर लोडिंग करवा कर दिखाए।
प्रदेश संगठन महामंत्री जसबीर सिंग और प्रदेश महासचिव वदूद आलम ने कहा कि सवाल है कि क्या कभी सरपंच के खिलाफ, किसी जनपद सीईओ के खिलाफ,माइनिंग इंस्पेक्टर के खिलाफ सरकार ने कोई कार्यवाही की है? सब कुछ जानते हुए भी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का संरक्षण रेत तस्करों को प्राप्त है। प्रदेश में कानूनी हालात बद से बदतर होते जा रहें हैं।
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