संवाददाता डौण्डी ब्लॉक - शांतनु राम कुलदीप
स्थान - दल्ली राजहरा
विश्व पर्यावरण दिवस (WED) 5 जून को मनाया जाने वाला एक वार्षिक कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य हमारे पर्यावरण को संरक्षित करने और उसकी बेहतरी के लिए जन-सामान्य में जागरूकता बढ़ाना है। 1972 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित विश्व पर्यावरण दिवस, पर्यावरण संबंधी कार्रवाई को बढ़ावा देने और समुदायों को संधारणीय (Sustainable) जीवन जीने के लिए प्रेरित करने के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में कार्य करता है। इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस का विषय "प्लास्टिक प्रदूषण को हराएं" (Beat Plastic Pollution) है, जो कि प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने, प्लास्टिक के उपयोग को अस्वीकार करने, पुनः उपयोग करने, पुनर्चक्रण करने की गतिविधि पर केंद्रित है।
विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन 143 से अधिक देशों को एक मंच पर लाकर प्लास्टिक प्रदूषण, समुद्री प्रदूषण, ग्रीन हाउस के प्रभाव, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण, ओवर-पॉपुलेशन, ग्लोबल वॉर्मिंग, सस्टनेबल कंजम्प्शन और वाइल्ड लाइफ क्राइम जैसे पर्यावरणीय मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाता है। हम देख रहे हैं कि दशकों से प्लास्टिक-प्रदूषण दुनिया के हर कोने में फैल चुका है, यह हमारे खाने-पीने के सामान के जरिये हमारे शरीर में समा रहा है। प्लास्टिक प्रदूषण एक बड़ी चिंता का विषय है, यह आज की पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक है। हमें विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने और उसे निभाने का संकल्प लेना चाहिए।
प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या से निपटने इन उपायों का करें पालन :-
• प्लास्टिक के उपयोग को कम करें और इसके निपटान के लिए सही तरीके अपनाएं।
• कपड़े के बैग और स्टील या ग्लास की बोतलें उपयोग करें।
• प्लास्टिक के उत्पादों को रिसाइकल करें और अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखें।
• प्लास्टिक प्रदूषण के प्रति जागरूकता बढ़ाएं और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें।
• सरकार और संगठनों के साथ मिलकर प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए काम करें।
सारी दुनियां में पर्यावरण संरक्षण के लिए अलग-अलग स्तर पर तथा अलग-अलग तरीकों से कार्य कार्य किया जा रहा है। इसी प्रकार हमारा लौह अयस्क समूह प्रबंधन भी पर्यावरण संरक्षण के लिए अपने स्तर पर निरंतर कार्य कर रहा है। अनेक वर्षों से खान क्षेत्रों में अनुपयोगी बेंच, वेस्ट डम्प एवं खुले क्षेत्रों में पौधों का रोपण किया जाता रहा है। वर्ष 2024-25 में 26250 पौधों का रोपण लौह अयस्क समूह की खानों में किया गया, साथ ही इस वर्ष 2025-26 में भी 25000 पौधों का रोपण किया जाएगा। डंप स्लोप में भूमि के कटाव को रोकने के लिए इस मॉनसून में राजहरा माइन्स में वेटिवर ग्रास (Vetiver Grass) का रोपण किया जाएगा। प्रदूषण की रोकथाम के लिए खदान के विभिन्न क्षेत्रों में स्प्रिंकलर के द्वारा पानी का लगातार छिडकाव किया जाता है। राजहरा एवं दल्ली क्रशिंग प्लांट में डि-डस्टिंग सिस्टम लगाया गया है एवं चार्जिंग व डिस-चार्जिंग पॉइंट पर वाटर स्प्रे सिस्टम लगाया गया है। जल प्रदूषण को रोकने हेतु 37 चेक डैम का निर्माण किया गया है। गैरेज आदि से उपयोग के बाद निकलने वाले प्रदूषित जल के उपचार के लिए ई.टी.पी. तथा सीवेज जल के उपचार के लिए एस.टी.पी. स्थापित किया गया है। पर्यावरण प्रयोगशाला द्वारा पानी की गुणवत्ता, वायु एवं ध्वनि प्रदूषण स्तर की जांच एवं ब्लास्टिंग-जनित ग्राउंड वाइब्रेशन की जांच की जाती है।
मुझे विश्वास है कि हम दल्ली राजहरा खान बिरादरी के लोग अपने चारों ओर के जीव-जंतु पेड़-पौधों एवं वातावरण का संरक्षण करते हुए अपने क्षेत्र एवं नगर को समृद्ध एवं प्लास्टिक मुक्त बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
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