संवाददाता शुभो पाईक की रिपोर्ट
कांकेर- युक्तियुक्तकरण के तहत बस्तर के बीहड़ों में कार्यरत स्थानीय शिक्षक हो जाएंगे अतिशेष तो बच्चों को पढ़ाएगा कौन? शिक्षक साझा मंच ने इस विषय को लेकर प्रदेश अध्यक्ष भाजपा श्री किरण देव को ज्ञापन सौंपा व आवश्यक सुझाव दिए।भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री किरण देव के कांकेर आगमन पर शिक्षक साझा मंच जिला कांकेर के पदाधिकारियों द्वारा अपनी मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपते हुए बस्तर संभाग में अतिशेष शिक्षक युक्तियुक्तकरण की विसंगतियों पर ध्यानाकर्षण करते हुए कहा कि बस्तर संभाग व अनुसूचित क्षेत्र के संदर्भ में वर्तमान में जारी नियम छात्र व शिक्षकों के लिए पूर्णतया अहितकारी है ।शिक्षक साझा मंच पदाधिकारी वजीद खान,हेमेंद्र साहसी,राजेश शर्मा,स्वदेश शुक्ला,नंदकुमार अटभैया,नितेश उपाध्याय,अमित राठौर,संतोष जायसवाल, मीडिया प्रभारी कृष्णेंदु आइच ने कहा कि बस्तर संभाग में 1998 में स्थानीय भर्ती अभियान के तहत स्थानीय युवाओं की भर्ती शिक्षाकर्मी के रूप में की गई ।तब से बस्तर संभाग के स्थानीय युवा अपनी सेवाएं देते हुए बस्तर संभाग के बीहड़ो की शिक्षा की मशाल थामे हुए हैं।बस्तर के बीहड़ों,संवेदनशील क्षेत्रों में जहां कोई शिक्षक नहीं जाना चाहता था वहां स्थानीय युवक दूरस्थ अंचलों में शिक्षा की अलग जगह रहे हैं।ऐसे में वर्ष 2023 एवं 2025 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य स्तरीय भर्ती प्रक्रिया अपनाते हुए पूरे प्रदेश से युवाओं की भर्ती बस्तर संभाग और सरगुजा संभाग में की गई तथा अधिकांश जगह उन्हें ऐसे स्कूलों में पदस्थापना कर दी गई जहां पर पहले से ही शिक्षक कार्यरत थे।विसंगति पूर्ण 2024 के युक्तियुक्तकरण नियम में इन
नवनियुक्त शिक्षकों की गणना अतिशेष के रूप में नहीं करने से पुराने स्थानीय शिक्षक अतिशेष होकर अन्यत्र पदस्थापित किया जा रहे हैं।नव नियुक्त शिक्षक परीविक्षा अवधि की समाप्ति पश्चात स्थानांतरण होकर अपने गृह जिले में चले जाएंगे स्थानीय शिक्षक को हटा देने व परीवीक्षा अवधि के शिक्षकों के स्थानांतरण पश्चात बस्तर की शिक्षा व्यवस्था पूर्णतया चरमरा जाएगी, क्योंकि राज्य द्वारा उन शाला में ही शिक्षक की भर्ती की गई जहां पहले से पुराने शिक्षक कार्यरत थे,इस स्थिति में सभी जगह से स्थानीय शिक्षक अतिशेष कर हटाए जा रहे हैं।शिक्षक साझा मंच ने सुझाव देते हुए कहा कि वर्तमान में छात्रावास अधीक्षक की गणना मूल पद से किए जाने के स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा जिला शिक्षा अधिकारियों को यह निर्देश दिए गए कि उन्हें अतिशेष की गणना से पृथक रखा जाए,इसी भांति बस्तर संभाग में परीवीक्षा अवधि वाले शिक्षकों को अतिशेष की गणना से पृथक रखते हुए उन्हें चिन्हाँकित कर परीवीक्षा अवधि समाप्ति के बाद रिक्त शालाओं में समायोजित किया जा सकता है।साझा मंच ने यह भी सुझाव दिया कि बस्तर संभाग के परिपेक्षय में 2014 के अतिशेष नियम अनुसार इस सत्र में सेवानिवृत्ति होने वाले शिक्षक,गंभीर बीमारी,पति-पत्नी प्रकरण या अन्य जिलों से शासन के नियमों के तहत स्थानांतरण से आए हुए शिक्षक,संकुल समन्वयक, शिक्षक संघ के पदाधिकारी,अतिथि शिक्षक को यदि गणना से पृथक रखा जाता है तो स्थानीय शिक्षक प्रभावित नहीं होंगे व सुदूर अंचलों में शिक्षण व्यवस्था सुचारू रूप से चल पाएगी।प्रदेश अध्यक्ष श्री किरण देव ने बस्तर संभाग के परिपेक्ष्य में इन सुझाव को शासन तक पहुंचाने हेतु आश्वस्त किया व उन्होंने कहा कि इसका परिणाम बस्तर के हित में होगा।कांकेर लोकसभा के पूर्व सांसद मोहन मंडावी ने इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष शिक्षकों का पक्ष रहते हुए कहा कि 18 पीरियड दो शिक्षक द्वारा पढ़ा पाना असंभव है।उन्होंने भी अनुरोध किया कि छात्र शिक्षक हित में उचित कदम उठाए जाएं।साझा मंच ने प्रदेश अध्यक्ष से अनुरोध भी किया कि साझा मंच व प्रदेश सरकार की बैठक शीघ्र आयोजित कर इस समस्या का हल निकाला जाए।इस अवसर पर कांकेर विधायक श्री आशाराम नेताम ने,भारतीय जनता पार्टी जिला अध्यक्ष महेश जैन, अनुराग उपाध्याय सहित शिक्षक साझा मंच के पदाधिकारी वजीद खान,हेमेंद्र साहसी,राजेश शर्मा,स्वदेश शुक्ला, नंदकुमार अटभैया,नितेश उपाध्याय, अमित राठौर, राजेन्द्र खुड़श्याम, सतीश साहू, शीतला पांडे, चिंतामणि यादव, राजेन्द्र जैन,रुपेंद्र मंडावी,कमलेश साहू सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।
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