गोर्रा जावा/मडिया पेज

 संवाददाता:- मुकेश कोरचा बंदे 


प्रकृति और मिट्टी से जुड़े आदिवासी गर्मियों में खुद को एक "विशेष आहार "से ठण्डा रखते है ,जिसे "गोर्रा जावा :कहते है।आदिवासियों का "हेल्दी प्रोटीन ड्रिंक" जो "औषधीय गुणों" और सेहत से भरपूर "फिंगर मिलेट "(finger millet) यह एक "परंपरागत खाद्य अनाज "है जो "स्वस्थ और पोषणशील "है इसका उपभोग पेय पदार्थ के साथ भोजन मे इसका इस्तेमाल जैसे रोटी ,दोसा, इडली, लड्डू, केक, पराठा,हेल्थी नट्स इत्यादि भोज्य पदार्थ बनाया जाता है। 


दुनिया का ऐसा "अदभूत पेय पदार्थ" जो एक साथ प्यास, भूख ,गर्मी थकान मिटाता है,प्रतिरोधक क्षमता और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है ।ठण्डा ओ भी बिना ओजोन परत को नुकसान पहुंचाएँ।

गोडूम डिपा (झूम कृषि)के प्रारम्भिक कृषि विकास के "संकटकालीन परिस्थतियों" के समय से लेकर वर्तमान समय मे भी गोर्रा जावा "कोयतोर समुदाय "का मुख्य पदार्थ रहा है इन्होने अकाल, भारी सूखे,भारी गर्मी के दिनों में मानव समुदाय को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।इसलिए "गोण्डवाना व्यवस्था "में पवित्रतम स्थान प्रदान करते हुए पवित्रतम" गो 'शब्द से इसे "गोर्रा" नाम प्रदान किया गया है ,यह दुनिया का ऐसा अनोखा पेय पदार्थ है जो एक साथ गर्मी, भूख, प्यास ,थकान, आलस्य ,कब्ज को मिटाकर शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र, पाचनतंत्र, न्यूरो सिस्टम को मजबूत व सजग करता है। 

कोका कोला/पेप्सी जैसे शुगर के अधिकता वाले उत्पाद पाचनतंत्र को बिगाड़/असंतुलित कर देता है।जबकि गोर्रा जावा Microflora की क्रियाशीलता को बड़ा देता है जिससे माइक्रोफ्लोरा अवांछनीय फंगस और बैक्टीरिया के अनियन्त्रित विकास को "संतुलित" करता है।भूख मिटाता है,प्यास मिटाता है,शारीरिक रोम छिद्र को खोलकर त्वचीय गर्मी से निजात दिलाता है ।मस्तिष्क को संतुलन प्रदान करता है एल्कोहल का अल्पांश थकान को मिटाता है गोर्रा जावा में B ,B12 ,C ,E जैसे विटामिन शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। 



जनजातियों के लिए यह निम्न बहुत से कारणों के कारण जो गोर्रा जावा अति महत्वपूर्ण पेय पदार्थ बनाता है।

(1) गोर्रा जावा अर्थात मडिया पेज जिसमें "कार्बोहाइड्रेट" की प्रर्याय मात्रा होती है इसलिए गर्मी में भूख मिटाने का" सर्वोत्तम पेय" है।

(2)गोर्रा जावा को कुछ दिन पूर्व "फार्मेशन "कि प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है इसलिए इनमें अल्पमात्रा में "ऐल्कोहल" भी फार्मेट होता है जो भारी थकान को ठीक करता है।

(3)शर्करा की मात्रा कम होने व कोदो/गोड/कव/डूमर/के मिश्रण से यह शुगर रोगियों के लिए सुरक्षित भोज्य आइटम है।

(4)विटामिन B12 का भी महत्वपूर्ण श्रोत है जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में वृध्दि होती है।

(5)आंत में पाए जाने वाले "माइक्रोफ्लोरा "जिसके क्रियाशीलता को कोका कोला /पेप्सी जैसे शर्करा जन्य पेय पदार्थ कमजोर कर देते है जबकि गोर्रा जावा माइक्रोफ्लोरा के( क्रियाशीलता को बड़ाकर भोजन के "पाचन सिस्टम "को दुरस्त करता है।

(6) मडिया में भरपूर "अंतियोक्सीडेंटस विटामिन "और मिनरल्स "से भरपूर होता है ऊर्जा स्तर को बढ़ाने में सहयोग और वजन नियंत्रण में मदद करता है।

(7) गोर्रा जावा शरीर के त्वचीय रोम छिद्रो को खोलकर त्वचीय गर्मी से निजात दिलाता है जिससे शरीर का तापमान संतुलित रहता है।

(8)गोर्रा जावा में बहुत से अनाजो/फलों /बीजों/फूलों/पत्तियों /कन्दो को मिलाकर इसे "मल्टी विटामिन पेय पदार्थ "की तरह उपयोग कर सकते है जो कि कार्बोहाइड्रेड से भी लैस होता है

(9)लू /डिहाइड्रेशन/अपचक/कुपोषण आदि के लिए यह लगभग एक "मेडिसिन लिक्विड पैकेट्स" की तरह है।

(10) यह एक कार्बोहाइड्रेड युक्त ऐसा अदभूत पेय पदार्थ है जिसे हम 48 घण्टों से भी अधिक समय तक सुरक्षित उपभोग कर सकते है।

(11) वजन घटाने में कारगर--मडिया में "फाइबर" की मात्रा अधिक होती है जो भूख को नियंत्रित करने में सहायक होती है

(12)हड्डियों के लिए मददगार--गोर्रा में अच्छी मात्रा में" कैल्शियम "होता है जो हमारे हड्डियों और दांतो के लिए आवश्यक होती है। 


(13)डायबिटीज/रक्त शर्करा--रागी में "ग्लाईसेनिक इंडेक्स" कम होता है जो "ब्लड शुगर लेवल "को कंट्रोल करने मे मददगार है

(14)एनीमिया से बचाता है--आयरन का अच्छा स्त्रोत है जो "हीमोग्लोबिन" के स्तर को बढ़ाता है और "एनीमिया" से बचाता है।

(15)ह्रदय के स्वास्थ्य के लिए अच्छा--कोलेस्ट्राल और बीपी को नियंत्रित करने में मदद करता है जिससे ह्रदय के रोगो का खतरा कम हो जाता है।

(16)त्वचा और बालों के लिए लाभदायक--फिंगर मिलेट में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट त्वचा और बालों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।

(17)फिंगर मिलेट में अमीनों अम्ल, कैल्शियम, मैग्नीशियम, तत्व, ग्लूकोज, प्रोटीन, वसा, आयरन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज और फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। साथ ही बी-काॅम्प्लेक्स विटामिन जैसे थाईवान (बी1) ,राइबोफ्लोविन (बी2),नियासिन (बी3) जो ऊर्जा चयापचय और समग्र स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।

(18)इसे लम्बे समय तक उबाल कर बनाया जाता है इसलिए नदी ,नाले ,झरने से ली गई पानी का उपयोग कर इसे पकाने पर भी यह पूरी तरह "हानिकारक बैक्टीरियो" से सुरक्षित रहता है गोर्रा जावा के कारण कोयतोर समुदाय हमेशा पानी उबाल कर पीने वाले बैक्टीरियो से बचने वाले दुनिया के "सजग प्रजातियों" में गिने जा सकते है। 


(19)गोर्रा जावा को अत्यधिक गर्मी के दिनों में पीने से यह "ऑक्सीजन व हीमोग्लोबिन "के संतुलित प्रवाह को सुनिश्चित करती है।शरीर के आंतरिक तापमान को नियंत्रित करने गर्मी के मौसम में "मस्तिष्कीय चिड़चिड़ापन "को नियंत्रित करती है।

(20) यह मानव के "शारीरिक घड़ी" को टाइमिंग सेट करने के अनौखे काम में भी प्रयुक्त होता है।इसका प्रयोग आदिवासी खेतो व फसलों की रात्रि में रखवाली करने वाले पर की जाती है।

(21) यह पुरूषों के सेक्स क्षमताओ को बढ़ाने व महिलाओ को अनियंत्रित मासिक धर्म संबंधित समस्याओ को नियंत्रित करती है।

(22)इसके पूरक डिश/गर्मी में उपलब्ध आहार आम की चटनी, चपोड़ा चटनी,झिर्रा चटनी,मोहटी चटनी आदि डिश जो गोर्रा जावा के साथ और भी जायकेदार हो जाती है।जो शरीर के विटामिन ए ,विटामिन सी ,फोलिक एसीड आदि की भरपाई करते रहती है।

(23) गोर्रा/रागी का रोटी और हलवा बनाया जाता है जिसे कुपोषित बच्चों को और गर्भवती महिलाओ को खिलाया जाता है।

(24)मडिया एक आयुर्वेदिक औषधि भी है जिनको हाथ -पैर दर्द होता है या घठिया के जो बीमार होते है इसके उपभोग से राहत मिलता है।

(25) मानव समुदाय के शिकार/भोजन/सुरक्षित खेती/सुरक्षित बसाहट की तलाश में लम्बी यात्राओं के दौर में यह सबसे महत्वपूर्ण व सरल भोज्य पदार्थ था जिसने मानव संसाधन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

(26)पाचन तंत्र-गोर्रा जावा में फाइबर की मात्रा होती है जो पाचन को बेहतर बनाने और पेट को हेल्दी रखता है।

(27) आयुर्वेद में गोर्रा को मडुआ/ मंडुआ /क्षुद्रधन्य/त्रुंधन्य/नाचनी नाम से भी जाना जाता है।



गोर्रा आदिवासियों के "गोंडरी इकोनॉमिक सिस्टम" का महत्वपूर्ण अंग है, मडिया के बहुउद्देशीय औषधीय गुणों के कारण जनजाति समुदाय इनके सम्मान में पवित्र पर्व "मरका पंडुम/चैतरई महापर्व "मनाते है और प्रकृतिपेन और पुरखों को मडिया की बीज अर्पित करते है इसके बाद इनका उपभोग किया जाता है।


चरक संहिता सहित "आयुर्वेदिक ग्रंथो" में सदिंयो से" गोर्रा(मडिया)"के गुणों का बखान.. किया गया है जो संतुलित आहार ,..."जीवनशक्ति और दीर्घायु "को बढ़ावा देने में गोर्रा के भूमिका पर जोर देता है। 

गोर्रा वर्तमान समय में "पोषण मूल्य और स्वास्थ्य लाभों" के लिए "वैश्विक मान्यता" प्राप्त कर रहा है। अपने आहार में "गोर्रा "को शामिल करना न केवल "प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान" का एक "संकेत" है ...बल्कि आपके "समग्र स्वास्थ्य और तंदुरूस्ती" को बढ़ाने के दिशा में एक ..ठोस कदम है ।इसकी "पोषक तत्वो "से भरपूर संरचना ,दोष-विशिष्ट गुण और स्वास्थ्य लाभो की ..एक विस्तृत श्रृंखला, इसे किसी भी आहार में एक "मूल्यवान जोड़ "बनाती है।चाहे आप इसे आरामदायक ..पेय पदार्थ या भोज्य पदार्थ या किसी अन्य रचनात्मक पाक रूप.. में चखना ..गोर्रा में आपके ..शरीर..मन. और .आत्मा ..को पोषण देने की क्षमता है। 


आदिवासियों के "सदियों पुराने ज्ञान" को अपनाकर और "गोर्रा "के "स्वास्थ्य वर्धक गुणों" का लाभ उठाकर .बेहतर स्वास्थ्य .की आपकी यात्रा शुरू करे। 

आपका शरीर ..अपनी नई जीवन शक्ति.. और संतुलन के साथ.. निस्संदेह इसके लिए आपको धन्यवाद दे.


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