हस्ताक्षर साहित्य समिति ने किया ' शिक्षा श्री' तामसिंग पारकर का सम्मान

 ब्यूरो समाचार -दिनेश कुमार नेताम 6261807595

स्थान - दल्ली राजहरा 

            दल्ली राजहरा निषाद समाज भवन में हस्ताक्षर साहित्य समिति का मासिक काव्य गोष्ठी संपन्न हुआ। अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष श्री संतोष कुमार ठाकुर ' सरल' ने किया। मुख्य अतिथि श्री शमीम अहमद सिद्दीकी तथा विशेष अतिथि गोविंद पणिकर तथा घनश्याम पारकर थे। कार्यक्रम के प्रथम चरण में धमतरी को देशभर में पहचान दिलाने वाले प्रख्यात कवि सुरजीत नवदीप के दुखद निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए समिति के अध्यक्ष श्री संतोष कुमार ठाकुर सरल ने कहा कि आज हमारे प्रिय कवि नवदीप के निधन होने से हम सभी को गहरा दुख हुआ है,उनकी रचनाएं हमें हमेशा प्रेरित करती रहेगी। हम उनके अद्भुत कार्यों को हमेशा याद रखेंगे। तत्पश्चात हस्ताक्षर साहित्य समिति के कोषाध्यक्ष व्याख्याता तामसिंग पारकर को मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण 2025 ' शिक्षा श्री ' की उपाधि मिलने पर उनका स्वागत सम्मान किया । वरिष्ठ साहित्यकार शमीम अहमद सिद्दीकी ने कहा कि तामसिंग पारकर कर्मठ एवं बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी शिक्षक व साहित्यकार हैं जिन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित कर उनका मार्गदर्शन करना और छात्रों को उनके पूर्ण क्षमता तक पहुंचने में मदद कर असाधारण कार्य किया है। वही श्रृंगार का उपयोग करके अपनी कविता में आकर्षण भरता है और श्रोता के हृदय को छू लेता है। 


        कार्यक्रम के दूसरे चरण में समिति के कलमकारों द्वारा काव्य पाठ किया। वरिष्ठ साहित्यकार शमीम सिद्धकी ने अपने रचना के माध्यम से बताया कि सुख और दुख मानव के कर्मों का ही परिणाम है। इसलिए परिणाम को सजदा से स्वीकार करने में ही बुद्धिमानी है। जो परिणाम को सहजता से स्वीकार कर लेता है, वह अनेक प्रकार के मनोविकारों से बच जाता है। इसी में जीवन के सुख का सूत्र निहित है। उनकी रचना इस प्रकार थी 

दुख आते हैं कर्मों के सृजन के साथ  

सहज लेता हूं मन से नमन के साथ। फिर चल पड़ता हूं जीवन के उसी पथ पर

 विचारों के कुछ परिवर्तन के साथ।। 

    संतोष कुमार ठाकुर ' सरल' ने अपनी रचना में हिंदी भाषा के महत्व यह भारत की संस्कृति एकता और पहचान का प्रतीक है, जो सामाजिक संबंधों को मजबूत करती है और आपस में जोड़ती है । यह हमारी राजभाषा है जो शिक्षा साहित्य व्यवसाय और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है , उनकी रचना इस प्रकार थी

    आन बान है शान है हिंदी,

 शब्दों का गुणगान है हिंदी ।

मिल बैठ भरोसे प्रेम भाव से

 मीठी सी पकवान है हिंदी।।


पर जोर देते हुए कहा कि पर्यावरण

 संरक्षण का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है जिसकी चुनौतियों का मूल कारण दुनिया की तेजी से बढ़ती आबादी है। उनकी रचना इस प्रकार है

 प्रदूषण उन्मूलन करने, पर्यावरण संरक्षण करें, वृक्षारोपण करें और प्रकृति का श्रृंगार करें

वरिष्ठ साहित्यकार ने अपनी कविता के माध्यम से बताया कि वर्तमान में प्रदूषण वनों की कटाई और ताप वृद्धि के कारण गौरैया भोजन और घोंसला की तलाश में शहरों से पलायन कर रही है, हालांकि ग्रामीण इलाकों में भी उन्हें आराम नहीं मिल पा रही है। उनकी रचनाएं इस प्रकार हैं 

अब मेरे घर गौरैया नहीं आती 

तुम कहां चली गई हो ।

ओ मेरी प्यारी नन्ही चिड़िया

एक ऐसा हुआ तुम्हें देखे हुए ।।


 वीर रस के उम्दा कवि अमित प्रखर ने अपनी कविता के माध्यम से संदेश दिया कि स्थाई साहस और चरित्र की स्थिरता का नाम ही वीरता है। सच्चा वीर अपने साहस का दुरुपयोग नहीं करता और नहीं उसका दिखावा करता है, रचनाएं इस प्रकार हैं 

देश मांगे हैं शहादत, कहो पहले शीश कौन देगा।          

  हास्य कवि और व्यंग्यकार घनश्याम पारकर ने अपनी कविता से सभी को गुदगुदाते हुए संदेश दिया कि सबसे पहले सुरक्षा है, निश्चित रूप से उत्पादन वातावरण में विभिन्न खतरों के अधीन होते हैं। सुरक्षा निर्देशों का पालन किए बिना उत्पादन संभव नहीं है। सुरक्षा और उत्पादन एक दूसरे के पूरक हैं।उनकी कविता इस प्रकार है

एक बार सुरक्षा और उत्पादन में ठंड गया

कविता लिखने का मेरा मन बन गया।

सुरक्षा और उत्पादन से मैं कुछ सीख रहा था

अपनी पैनी कलम से कविता लिख रहा था।

युवा साहित्यकार तामसिंह पारकर ने सामाजिक तथा पारिवारिक संबंधों में जो विकार हैं उसे अपनी कविता में उकेरा तथा उससे बचने का संदेश देकर काफी वह वही बटोरी। उनकी कविता कुछ इस प्रकार है 

निचट शराबी अ ऊं जुआरी, बाप रहे ना भाई

   काव्य गोष्ठी का संचालन अमित प्रखर ने किया तथा घनश्याम पारकर ने आभार प्रदर्शन किया।



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